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7 दिन में 11 लाख की कमाई! चिप्स के पैकेट से इस शख्स ने बनाया ऐसा आइडिया कि बरसने लगा पैसा

क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा फेंका गया चिप्स का पैकेट किसी को लखपति बना सकता है? अमेरिका की नौकरी छोड़ भारत लौटे एक शख्स ने कचरे से 'स्टाइलिश चश्मे' बनाने का ऐसा अनोखा बिजनेस शुरू किया कि महज 7 दिनों में 11 लाख रुपये कमा लिए। जानें इस कमाल के आईडिया की पूरी कहानी।

By Pinki Negi

7 दिन में 11 लाख की कमाई! चिप्स के पैकेट से इस शख्स ने बनाया ऐसा आइडिया कि बरसने लगा पैसा
चिप्स के पैकेट

अक्सर हम चिप्स खाने के बाद उसके खाली पैकेट को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन अनीश मालपानी नाम के एक शख्स ने इसी कचरे को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। अनीश ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे इन प्लास्टिक के पैकेटों को रीसायकल करके कीमती सामान बनाया जा सकता है।

उनकी यह कोशिश इतनी कामयाब रही कि उन्होंने महज एक हफ्ते के भीतर ₹11 लाख की शानदार कमाई कर ली। अनीश का यह स्टार्टअप न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद कर रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि अगर सही सोच और तकनीक हो, तो बेकार समझा जाने वाला कचरा भी आपको रातों-रात लखपति बना सकता है।

चिप्स के कचरे से चश्मे बनाकर कमाया करोड़ों का नाम

करीब 36 साल के बीबीए ग्रेजुएट अनीश मालपानी अमेरिका में एक शानदार नौकरी कर रहे थे, लेकिन देश के लिए कुछ अलग करने के जुनून ने उन्हें भारत वापस खींच लिया। उन्होंने पर्यावरण को प्लास्टिक से बचाने और गरीबों की मदद करने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना।

अनीश ने चिप्स के खाली पैकेटों को रीसायकल करके बेहतरीन धूप के चश्मे (Sunglasses) बनाना शुरू किया। साल 2022-23 में जब उन्होंने अपनी वेबसाइट पर ये चश्मे लॉन्च किए, तो लोगों को उनका आइडिया इतना पसंद आया कि लॉन्च के पहले ही हफ्ते में उन्होंने करीब ₹11 लाख का कारोबार कर लिया। अनीश ने साबित कर दिया कि सामाजिक भलाई और बिजनेस एक साथ किए जा सकते हैं।

ऐसे हुई दुनिया की पहली ‘WITHOUT’ चश्मा कंपनी की शुरुआत

अनीश मालपानी ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से पढ़ाई पूरी की और वहां एक सफल करियर बनाया, लेकिन मुंबई के देवनार डंपिंग ग्राउंड में प्लास्टिक कचरे के बीच काम करने वाले गरीबों की स्थिति देखकर उनका मन बदल गया। उन्होंने समाज और पर्यावरण की मदद करने के लिए अपनी आलीशान नौकरी छोड़ दी।

अनीश ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की जिससे चिप्स के पैकेटों (मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक) को पिघलाकर उच्च गुणवत्ता वाला प्लास्टिक बनाया जा सके। इसी से उन्होंने ‘WITHOUT’ नाम की कंपनी शुरू की, जो कचरे से स्टाइलिश धूप के चश्मे बनाती है। यह दुनिया की अपनी तरह की पहली पहल है जो बेकार कचरे को फैशन और सामाजिक बदलाव में बदल रही है।

जब एक बिज़नेसमैन और साइंटिस्ट ने मिलकर शुरू की अनोखी खोज

साल 2020 में अनीश मालपानी ने अपनी कंपनी ‘आशया रीसाइक्लर्स’ (Ashaya Recyclers) की नींव रखी। उन्होंने महसूस किया कि चिप्स के पैकेट जैसे जटिल प्लास्टिक (MLP) को रीसायकल करना बहुत मुश्किल काम है और दुनिया में इसके लिए कोई ठोस तकनीक नहीं है।

इस चुनौती को पार करने के लिए अनीश ने एक केमिस्ट्री विशेषज्ञ (PhD) को अपनी टीम में शामिल किया। इन दोनों ने मिलकर दिन-रात रिसर्च की ताकि कचरे के पैकेटों से एक ऐसा शानदार मटेरियल तैयार किया जा सके, जिससे प्रीमियम क्वालिटी के प्रोडक्ट्स बनाए जा सकें। उनकी इस वैज्ञानिक सोच ने ही नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।

कचरा बीनने वालों की किस्मत भी बदल रहे हैं अनीश मालपानी

अनीश मालपानी की कंपनी ‘WITHOUT’ सिर्फ चश्मे ही नहीं बना रही, बल्कि भारत के उन लाखों कचरा बीनने वालों (Waste Pickers) को सम्मान और बेहतर भविष्य भी दे रही है जो बेहद गरीबी में जीवन बिताते हैं। अनीश का मानना है कि यदि हम पर्यावरण की समस्या सुलझा रहे हैं, तो हमें इस काम से जुड़े सबसे जमीनी लोगों की मदद भी करनी चाहिए।

यही कारण है कि उनकी कंपनी अपनी कुल बिक्री का 10% हिस्सा सीधे उन लोगों के बच्चों की शिक्षा और देखभाल पर खर्च करती है। इस नेक पहल से अनीश न केवल प्लास्टिक प्रदूषण कम कर रहे हैं, बल्कि हाशिए पर खड़े परिवारों के लिए खुशहाली के रास्ते भी खोल रहे हैं।

पुणे की महिलाओं के साथ मिलकर कचरे को बनाया फैशन

अनीश मालपानी की पहल अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। वे ‘पुणे वेस्ट पिकर कलेक्टिव’ नाम के संगठन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं कचरे से चिप्स के पैकेट चुनकर अनीश की कंपनी को पहुँचाती हैं, जिसके बदले उन्हें 6 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

हैरानी की बात यह है कि मात्र 5 खाली चिप्स के पैकेट से एक शानदार और फैशनेबल चश्मा तैयार हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 3 से 4 दिन की कड़ी मेहनत लगती है। इस तरह, अनीश न केवल धरती को प्लास्टिक मुक्त बना रहे हैं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी जीवनशैली में भी सुधार ला रहे हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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