
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकार में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला के ससुर की मृत्यु के बाद वह विधवा हो जाती है, तो भी वह अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण (Maintenance) प्राप्त करने की पूरी हकदार है।
यह कानूनी अधिकार हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत दिया गया है। कोर्ट के इस आदेश का सीधा मतलब यह है कि पति की मृत्यु के बाद भी महिला बेसहारा नहीं होगी और उसे अपने ससुराल की संपत्ति से आर्थिक मदद पाने का कानूनी हक मिलता रहेगा।
विधवा बहू के अधिकार पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की बेंच ने कानून की व्याख्या करते हुए एक बड़ी बाधा दूर कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा 21(vii) में “पुत्र की कोई भी विधवा” शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि बहू को भरण-पोषण देने के लिए यह देखना जरूरी नहीं है कि उसके पति की मृत्यु ससुर से पहले हुई थी या बाद में। कोर्ट के अनुसार, पति की मृत्यु का समय चाहे जो भी हो, विधवा बहू अपने ससुर की संपत्ति से गुजारा भत्ता पाने की पूरी हकदार है और इस अधिकार को तकनीकी आधार पर छीना नहीं जा सकता।
पति की मृत्यु कब हुई, यह मायने नहीं रखता
यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद और उनकी बहू गीता शर्मा के बीच संपत्ति और भरण-पोषण के विवाद से जुड़ा है। ससुर (डॉ. प्रसाद) का निधन 2021 में हुआ था, जबकि उनके बेटे (गीता के पति) की मृत्यु उसके बाद 2023 में हुई। फैमिली कोर्ट ने गीता शर्मा की मांग यह कहकर खारिज कर दी थी कि ससुर की मृत्यु के समय वह विधवा नहीं थीं।
लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए एक मिसाल कायम की। कोर्ट ने साफ किया कि पति की मृत्यु कभी भी हुई हो, एक विधवा बहू कानून के अनुसार अपने ससुर की संपत्ति पर “निर्भर” (Dependent) मानी जाएगी और उसे गुजारा भत्ता पाने का पूरा हक है।
‘पुत्र की कोई भी विधवा’ को मिलेगा भरण-पोषण का हक
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बड़ा कानूनी सवाल हल किया कि क्या ससुर की मृत्यु के बाद विधवा होने वाली बहू भी संपत्ति पर निर्भर मानी जाएगी? अदालत ने हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा 21(vii) का हवाला देते हुए कहा कि कानून में स्पष्ट रूप से “पुत्र की कोई भी विधवा” शब्द का प्रयोग किया गया है। कोर्ट ने साफ किया कि कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि पुत्र की मृत्यु ससुर से पहले होनी चाहिए। जजों ने कहा कि अदालत अपनी तरफ से कानून में कोई नया शब्द नहीं जोड़ सकती; इसलिए ससुर की मृत्यु के बाद भी विधवा हुई बहू भरण-पोषण की पूरी हकदार है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम व्याख्या
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की बेंच ने कानून की एक बड़ी उलझन को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा 21(vii) में “पुत्र की कोई भी विधवा” शब्द का उपयोग किया गया है, जो अपने आप में पूर्ण है। इसका अर्थ यह है कि बहू को गुजारा भत्ता देने के लिए यह शर्त बिल्कुल नहीं है कि उसके पति की मृत्यु ससुर से पहले हुई हो। कोर्ट के अनुसार, पति की मौत ससुर के जीवनकाल में हुई हो या उनके गुजरने के बाद, दोनों ही स्थितियों में विधवा बहू अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने की पूरी हकदार है।









