
तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार उन सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने की तैयारी में है, जो अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं। मुख्यमंत्री ने 12 जनवरी को घोषणा की कि कई बुजुर्गों को उनके बच्चों द्वारा बेसहारा छोड़ने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसे देखते हुए अगले बजट सत्र में एक नया कानून पेश किया जाएगा।
इस नियम के तहत, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता का ख्याल रखने में लापरवाही बरतता है, तो सरकार उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि जो लोग अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं, उन्हें सेवा में बने रहने या सरकारी लाभ लेने का नैतिक अधिकार नहीं है।
माता-पिता का ख्याल न रखने वाले कर्मचारियों की सैलरी से कटेंगे 15% पैसे
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार अगले बजट सत्र में एक नया बिल लाएगी। इसके तहत जो सरकारी कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा नहीं करेंगे, उनके वेतन से 10-15% की कटौती की जाएगी। यह काटी गई राशि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में भेजी जाएगी ताकि वे अपना खर्च चला सकें।
अब बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेंटर बनाएगी तेलंगाना सरकार
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि जो लोग अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखते, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में भी असफल हैं। बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सरकार ‘प्रणाम’ नाम से डे-केयर सेंटर शुरू करने जा रही है। सीएम ने चेतावनी दी है कि माता-पिता की शिकायतों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने इसे एक ‘मानवीय कदम’ बताया है ताकि वरिष्ठ नागरिक बिना किसी मजबूरी के गरिमा के साथ जी सकें।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुजुर्गों के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण के लिए भी बड़ी घोषणा की है। सीएम ने एलान किया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रत्येक नगर निगम (Municipal Corporation) में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक सह-सदस्य (Co-option Member) पद आरक्षित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व देकर समाज में बराबरी का हक दिलाना है।









