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सुप्रीम कोर्ट और HC के 5 बड़े फैसले: पति ने कहा ‘कमाती हो तो हक नहीं’, कोर्ट ने दिया करारा जवाब

क्या पत्नी की अपनी कमाई उसे गुजारा भत्ते से वंचित कर सकती है? 'पढ़ी-लिखी हो' या 'कमाती हो' जैसे बहानों पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जानें अदालत के वो 5 ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने पतियों की दलीलों को खारिज कर महिलाओं के आर्थिक स्वाभिमान पर मुहर लगा दी।

By Pinki Negi

सुप्रीम कोर्ट और HC के 5 बड़े फैसले: पति ने कहा 'कमाती हो तो हक नहीं', कोर्ट ने दिया करारा जवाब
सुप्रीम कोर्ट और HC के 5 बड़े फैसले

अदालतों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि शादी केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि बराबरी के अधिकारों और जिम्मेदारियों का एक मजबूत बंधन है। वैवाहिक विवादों में अक्सर महिलाओं को अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, लेकिन हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाकर महिलाओं के अधिकारों को और मजबूती दी है।

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई पत्नी बहुत अधिक शिक्षित है या उसके पास कोई प्रोफेशनल डिग्री (व्यावसायिक कौशल) है, तो केवल इस आधार पर पति उसे भरण-पोषण (Maintenance) देने से मना नहीं कर सकता। अदालत के मुताबिक, डिग्री होने का मतलब यह कतई नहीं है कि महिला के पास आय का जरिया भी उपलब्ध है, इसलिए पति अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।

पत्नी की डिग्री और हुनर पति को ‘भरण-पोषण’ की जिम्मेदारी से आजाद नहीं करते

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिलाओं के हक में एक बेहद अहम कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने परिवार न्यायालय के एक पुराने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि पत्नी अधिक शिक्षित है या उसके पास कोई विशेष व्यावसायिक हुनर (Professional Skill) है, उसे भरण-पोषण (Maintenance) से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने साफ किया कि पत्नी की काबिलियत पति के लिए अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से बचने का बहाना नहीं बन सकती। कोर्ट का मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त होना इस बात का सबूत नहीं है कि महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है या वर्तमान में उसके पास आय का कोई साधन मौजूद है।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को दोहराते हुए पति की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि पत्नी की कुछ निजी आय है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसकी आर्थिक जरूरतें खत्म हो गई हैं या उसे पति से सहायता की आवश्यकता नहीं है।

इस मामले में अदालत ने पति को हर महीने ₹17,000 का भरण-पोषण (Maintenance) देने का आदेश जारी रखा। यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि महिला की थोड़ी-बहुत कमाई उसके कानूनी अधिकारों को समाप्त नहीं करती और पति अपनी जिम्मेदारी से केवल इस आधार पर पल्ला नहीं झाड़ सकता।

पत्नी को मिलना चाहिए पति के स्तर का रहन-सहन, कमाई के बावजूद मिलेगा भत्ता

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में वैवाहिक अधिकारों को नई परिभाषा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पति की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसकी पत्नी अलग होने के बाद भी वैसी ही जीवन-शैली (Lifestyle) जी सके, जैसी वह शादी के दौरान जी रही थी।

अदालत ने यह भ्रम भी दूर कर दिया कि यदि पत्नी थोड़ा-बहुत कमा रही है, तो उसका भरण-पोषण का दावा खत्म हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पत्नी की मात्र कुछ आय होना उसे गुजारा भत्ते के अधिकार से वंचित नहीं करता, क्योंकि उसे अपने पति के सामाजिक और आर्थिक स्तर के अनुरूप गरिमापूर्ण जीवन जीने का पूरा हक है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पति के पास दांपत्य अधिकारों (Conjugal Rights) की बहाली की डिग्री है, तब भी वह पत्नी को भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता। अदालत के अनुसार, पत्नी साथ रह रही हो या नहीं, उसे आर्थिक सुरक्षा देना पति की कानूनी जिम्मेदारी है। यह फैसला महिला के सम्मानजनक जीवन और वित्तीय स्वायत्तता को सुरक्षित करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने तय की पति की जवाबदेही

सुप्रीम कोर्ट ने ‘रीना कुमारी बनाम दिनेश कुमार महतो’ मामले में महिलाओं के पक्ष में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्नी किसी ठोस या जायज़ कारण से अपने पति से अलग रह रही है, तो वह भरण-पोषण (Maintenance) पाने की पूरी हकदार है। कोर्ट ने आगे कहा कि पति के पक्ष में ‘दांपत्य अधिकारों की बहाली’ (Restitution of Conjugal Rights) का आदेश होने मात्र से पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। यह फैसला साफ करता है कि कानूनी आदेशों की आड़ में पति अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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