
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने छात्रवृत्ति योजना में बड़ा बदलाव करते हुए ‘नियमावली-2023’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी पैसे का लाभ केवल पात्र (Genuine) छात्र-छात्राओं को ही मिले।
यह नियम अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य वर्ग के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगा। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में अब आवेदन प्रक्रिया और भी पारदर्शी होगी, जिससे योग्य छात्रों की फीस भरपाई और स्कॉलरशिप बिना किसी रुकावट के उनके बैंक खातों तक पहुँच सकेगी।
स्कॉलरशिप के नए नियम
समाज कल्याण विभाग के अनुसार, छात्रवृत्ति नियमों में बदलाव का मुख्य मकसद निजी कॉलेजों की मनमानी और गलत तरीके से होने वाले एडमिशन को रोकना है। उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि अब मैनेजमेंट कोटा और स्पॉट एडमिशन जैसी प्रक्रियाओं की कड़ी जांच होगी, ताकि सरकारी पैसे का दुरुपयोग न हो सके। इस नई तकनीक और प्रशासनिक सख्ती से यह पक्का किया जाएगा कि छात्रवृत्ति का लाभ केवल उन मेहनती और जरूरतमंद छात्रों को ही मिले, जो वास्तव में इसके हकदार हैं। इससे पूरी एडमिशन प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी।
प्राइवेट कॉलेजों के लिए सख्त निर्देश
नए नियमों के अनुसार, अब निजी कॉलेजों में टेक्निकल या प्रोफेशनल कोर्स कर रहे SC और ST वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति तभी मिलेगी, जब उनका दाखिला पूरी तरह ईमानदारी और तय प्रक्रिया से हुआ हो। संस्थानों के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे एडमिशन के लिए सार्वजनिक विज्ञापन निकालें, आवेदनों की मेरिट लिस्ट तैयार करें और चयन सूची को सबके सामने प्रकाशित करें। इसके अलावा, कॉलेज छात्रों से केवल वही फीस ले पाएंगे जो सरकार या रेगुलेटरी कमेटी द्वारा तय की गई है। इस कदम से कॉलेजों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम लगेगी और केवल सही तरीके से प्रवेश लेने वाले छात्रों को ही सरकारी सहायता मिल सकेगी।
सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए बड़ी खबर
उत्तर प्रदेश सरकार के संशोधित नियमों के अनुसार, अब सामान्य वर्ग (General Category) के विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ तभी मिलेगा, जब उनका दाखिला पूरी तरह पारदर्शी और तय नियमों के तहत हुआ हो। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी संस्थानों को सरकार द्वारा निर्धारित और अनुमोदित फीस ही लेनी होगी।
यदि कोई कॉलेज तय सीमा से अधिक फीस वसूलता है या एडमिशन प्रक्रिया में हेराफेरी करता है, तो वहां के छात्र इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। यह नियम सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की रक्षा हो और शिक्षा के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पर रोक लगे।
सावधान! मैनेजमेंट कोटा और एक्स्ट्रा फीस देने वालों को नहीं मिलेगी स्कॉलरशिप
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने साफ कर दिया है कि मैनेजमेंट कोटा या स्पॉट एडमिशन जैसे तरीकों से दाखिला लेने वाले छात्रों को अब सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार केवल उन्हीं छात्रों की फीस भरपाई करेगी जिनका एडमिशन नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से हुआ है। इसके साथ ही, यदि कोई कॉलेज सरकार द्वारा तय की गई फीस से एक भी रुपया ज्यादा वसूलता है, तो उस संस्था के छात्र स्कॉलरशिप के लिए अपात्र (Ineligible) हो जाएंगे। यह सख्त कदम शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।









