
देश के लाखों सरकारी शिक्षकों के लिए एक अच्छी खबर है, जिससे उनकी नौकरी पर बना खतरा अब कम होता दिख रहा है। दरअसल, लंबे समय से पढ़ा रहे वे शिक्षक जो अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं कर पाए थे, वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपनी नौकरी को लेकर काफी डरे हुए थे। कोर्ट ने सभी के लिए यह परीक्षा अनिवार्य कर दी थी, जिससे 15-20 सालों से काम कर रहे अनुभवी शिक्षकों को अपनी सेवा और रिटायरमेंट की चिंता सताने लगी थी। लेकिन अब इस तनावपूर्ण स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है, जिससे इन शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
पुराने शिक्षकों की मांग
गैर-TET शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे स्कूल में बच्चों को बेहतर शिक्षा दें या अपनी नौकरी बचाने के लिए फिर से पढ़ाई कर परीक्षा पास करें। अनुभवी शिक्षकों का मानना है कि करियर के इस पड़ाव पर दोबारा परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बहुत कठिन है।
इसी समस्या को देखते हुए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि सालों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए या उनके लिए नियमों में कुछ ढील दी जाए, ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपना काम जारी रख सकें।
शिक्षकों के ब्योरे के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल
शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से 16 जनवरी तक उन शिक्षकों की पूरी रिपोर्ट मांगी है, जिनकी नियुक्ति साल 2011 से पहले हुई थी। सरकार जानना चाहती है कि कितने शिक्षकों ने अब तक TET पास किया है और कितनों ने नहीं, साथ ही उनकी उम्र और योग्यता क्या है। 31 दिसंबर को ही सभी राज्यों को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया था। सरकार के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि वह अनुभवी शिक्षकों के भविष्य पर कोई भी फैसला लेने से पहले जमीनी हकीकत को पूरी तरह समझना चाहती है, ताकि उन्हें सही राहत दी जा सके।
देशभर के 12 लाख शिक्षकों को मिली नई उम्मीद
केंद्र सरकार की इस पहल से देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों के भविष्य में सुधार की उम्मीद जगी है। अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे अनुभवी शिक्षक हैं जो TET पास नहीं कर पाए हैं। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख, मध्य प्रदेश के 3 लाख, राजस्थान के 80 हजार और झारखंड के 27 हजार प्राथमिक शिक्षक इस दायरे में आते हैं। अब इन सभी शिक्षकों की नज़रें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके अनुभव को देखते हुए TET की अनिवार्यता में बड़ी राहत दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और दी गई राहत की समय सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों के पास TET की योग्यता नहीं है, उन्हें हर हाल में दो साल के भीतर यह परीक्षा पास करनी होगी। ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है या समय से पहले रिटायर किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने मानवीय आधार पर एक छोटी राहत भी दी है; जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में केवल पांच साल या उससे कम का समय बचा है, उन्हें नियमों में कुछ हद तक छूट दी जा सकती है।
शिक्षकों के भविष्य पर अब सरकार के फैसले का इंतज़ार
अब देशभर की नजरें केंद्र और राज्य सरकारों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार पुराने और अनुभवी शिक्षकों को TET परीक्षा से छूट देने या उनके लिए कोई दूसरा रास्ता निकालने का फैसला करती है, तो इससे लाखों परिवारों की चिंता दूर हो जाएगी। सरकार का यह निर्णय न केवल शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके भविष्य को एक नई और सकारात्मक दिशा भी देगा। यह देखना अहम होगा कि सरकार अनुभव और नियमों के बीच कैसे तालमेल बैठाती है।









