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Petrol-Diesel News: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला! क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानें कच्चे तेल पर क्या बोले एक्सपर्ट्स

वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। क्या दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार से भारत को सस्ता पेट्रोल मिलेगा? एक्सपर्ट्स की मानें तो खेल 'सप्लाई रिस्क' और 'जियो-पॉलिटिकल प्रीमियम' के बीच फँसा है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

By Pinki Negi

Petrol-Diesel News: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला! क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानें कच्चे तेल पर क्या बोले एक्सपर्ट्स
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वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। हालांकि शुरुआत में दाम कुछ कम हुए थे, लेकिन सप्लाई रुकने के डर से कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं। भारतीय तेल कंपनियाँ भी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए अमेरिका के संपर्क में हैं, जिससे भविष्य में भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की एक उम्मीद जगी है। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय स्थितियों और सप्लाई की अनिश्चितता को देखते हुए यह कह पाना अभी कठिन है कि कीमतें कब और कितनी कम होंगी।

वैश्विक संकट और तेल बाजार की चुनौतियाँ

दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल, जैसे वेनेजुएला में राजनीतिक तनाव, ईरान के विरोध प्रदर्शन और रूस-यूक्रेन युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों और टैंकरों की आवाजाही में हो रही दिक्कतों के कारण बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ता है और सप्लाई चेन सुधरती है, तो तेल की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है और बाजार में स्थिरता आ सकती है।

तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह

मार्केट एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा के अनुसार, वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता और शिपिंग में आने वाली बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में ‘जियो-पॉलिटिकल प्रीमियम’ यानी युद्ध और तनाव का अतिरिक्त शुल्क जुड़ गया है। इसी डर से वैश्विक बाजार में WTI क्रूड लगभग 59 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 63 डॉलर तक पहुँच गया है। वर्तमान में तेल की महँगाई का कारण केवल वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि ईरान का आंतरिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और समुद्री रास्तों में टैंकरों की आवाजाही में होने वाली रुकावटें भी हैं। इन सभी वैश्विक कारणों ने मिलकर सप्लाई का जोखिम बढ़ा दिया है, जिससे बाजार अस्थिर बना हुआ है।

तेल की कीमतों में मामूली गिरावट और स्थिरता

इन्वेस्टिंग डॉट कॉम की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारी उछाल के बाद पिछले शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों के दामों में 0.2% की कमी आई, जिससे ब्रेंट 61.85 डॉलर और WTI 57.64 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। दरअसल, गुरुवार को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण कीमतों में 4% की बड़ी बढ़त देखी गई थी, लेकिन शुक्रवार को बाजार थोड़ा शांत हुआ और कीमतें दोबारा उसी स्तर पर लौट आईं जो वेनेजुएला संकट से पहले थीं।

तेल बाजार के उतार-चढ़ाव का मनोवैज्ञानिक कारण

मार्केट एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा के अनुसार, तेल की कीमतों में बदलाव निवेशकों की सोच पर निर्भर करता है। शुरुआत में बाजार को लगा कि अमेरिकी दखल से वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ेगा, जिससे कीमतें कम हुईं। लेकिन जल्द ही यह अहसास हुआ कि वहां की राजनीतिक अस्थिरता और खराब बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के कारण तेल की सप्लाई तुरंत शुरू होना संभव नहीं है। इसी डर और अनिश्चितता ने कीमतों की शुरुआती गिरावट को फिर से उछाल में बदल दिया।

वैश्विक संकट और तेल सप्लाई का बढ़ता जोखिम

कच्चे तेल के बाजार में इस समय सबसे बड़ी चिंता ‘सप्लाई रिस्क’ यानी आपूर्ति में रुकावट को लेकर है। दुनिया के तीन बड़े क्षेत्रों—वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल, ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और रूस-यूक्रेन युद्ध—ने बाजार में तनाव पैदा कर दिया है। हाल ही में ब्लैक सी में एक रूसी टैंकर पर हुए ड्रोन हमले ने रूसी तेल की सप्लाई रुकने का डर बढ़ा दिया है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक सख्त बिल को समर्थन देने की खबर है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है। इन सभी वैश्विक कारणों ने मिलकर तेल की कीमतों को अस्थिर बना रखा है।

ईरान का आंतरिक तनाव और वेनेजुएला की अनिश्चितता

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और इंटरनेट ब्लैकआउट ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है, क्योंकि इससे वहां के तेल उत्पादन में रुकावट आने का खतरा पैदा हो गया है। दूसरी ओर, वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद राजनीतिक संकट और समुद्री रास्तों की घेराबंदी (Blockade) ने स्थिति को और उलझा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वेनेजुएला से तेल की सप्लाई आने वाले समय में नियमित हो पाएगी या फिर राजनीतिक खींचतान और युद्ध जैसे हालात इसे और भी अस्थिर बना देंगे।

तेल भंडार और वास्तविक उत्पादन का अंतर

वेनेजुएला इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसका प्रशासन और तेल निर्यात का तरीका पूरी तरह बदल रहा है। अक्सर यह कहा जाता है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (लगभग 303 बिलियन बैरल) होने के कारण वेनेजुएला तेल की कीमतें कम कर देगा, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के 17% तेल रिज़र्व पर कब्ज़ा होने के बावजूद, वेनेजुएला का वास्तविक निर्यात वैश्विक आपूर्ति का 1% से भी कम (7.49 लाख बैरल प्रति दिन) है। इसका कारण वहां का जर्जर सिस्टम और राजनीतिक बदलाव है, जिसकी वजह से जमीन के नीचे तेल का विशाल भंडार होने के बाद भी बाजार में इसकी तत्काल सप्लाई बेहद सीमित है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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