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गाड़ी में सफर के दौरान क्यों आती है उल्टी? शरीर के ये 3 संकेत बताते हैं क्या है असली बीमारी, जानें बचने के अचूक उपाय

क्या आप भी सफर के दौरान जी मिचलाने और उल्टी से परेशान रहते हैं? यह कोई साधारण समस्या नहीं, बल्कि आपके दिमाग और शरीर के बीच की एक 'जंग' है। जानें इसके पीछे का चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण और वो आसान तरीके जिनसे आपका हर सफर खुशहाल बन सकता है।

By Pinki Negi

गाड़ी में सफर के दौरान क्यों आती है उल्टी? शरीर के ये 3 संकेत बताते हैं क्या है असली बीमारी, जानें बचने के अचूक उपाय
उल्टी

सफर के दौरान उल्टी आना या सिर घूमना कोई बीमारी नहीं, बल्कि हमारे शरीर के अंगों के बीच तालमेल की कमी का परिणाम है, जिसे मेडिकल भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। दरअसल, जब हम किसी वाहन में होते हैं, तो हमारे कान दिमाग को संकेत भेजते हैं कि हम गति में हैं, लेकिन हमारी आँखें (जो अक्सर अंदर की स्थिर चीज़ों को देखती हैं) दिमाग को बताती हैं कि हम स्थिर हैं।

इंद्रियों के इन विरोधाभासी संकेतों (Conflicting Signals) की वजह से दिमाग भ्रमित हो जाता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने वाले तंत्र में हलचल मच जाती है। इसी उलझन के कारण शरीर पर असर पड़ता है और हमें उल्टी या चक्कर आने जैसी शिकायत होने लगती है।

क्या है मोशन सिकनेस?

मोशन सिकनेस कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान शरीर में होने वाली एक विशेष प्रतिक्रिया है। आँकड़ों के अनुसार, हर तीन में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित होता है, जिसमें सफर के दौरान अचानक चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द या घबराहट महसूस होने लगती है।

चाहे आप बस-कार से सड़क पर हों, ट्रेन में हों, या फिर समुद्री जहाज़ और हवाई यात्रा पर—यह समस्या किसी भी माध्यम में हो सकती है। विशेष रूप से घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। असल में, यह स्थिति समुद्री यात्रा में होने वाली ‘सी-सिकनेस’ की तरह ही है, जो आपकी खुशनुमा यात्रा के मज़े को किरकिरा कर देती है।

एक्सपर्ट से जानें सफर में क्यों लगता है कि शरीर में ‘ज़हर’ फैल गया है

सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहसिन वली के अनुसार, मोशन सिकनेस असल में हमारे दिमाग को मिलने वाले विरोधाभासी संकेतों का नतीजा है। जब आप चलती गाड़ी में नीचे देखते हैं या किताब पढ़ते हैं, तो आपकी आँखें दिमाग को संदेश देती हैं कि आप ‘स्थिर’ हैं, लेकिन आपके कानों के अंदर का बैलेंस सिस्टम महसूस करता है कि शरीर ‘गति’ में है। इन अलग-अलग संकेतों से दिमाग भ्रमित हो जाता है और उसे लगता है कि आपने गलती से कोई ज़हरीली चीज़ खा ली है। इस काल्पनिक ज़हर के असर को खत्म करने के लिए दिमाग शरीर को उल्टी करने का निर्देश देता है, ताकि वह उसे बाहर निकाल सके।

सफर में उल्टी रोकने का सबसे आसान तरीका

मोशन सिकनेस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि आप गाड़ी में नीचे देखने के बजाय खिड़की से बाहर दूर क्षितिज (Horizon) की ओर देखें। ऐसा करने से आपकी आँखों और कानों को एक जैसे संकेत मिलते हैं, जिससे दिमाग का भ्रम दूर हो जाता है और जी मिचलाना बंद हो जाता है।

एक शोध के अनुसार, दुनिया का हर तीसरा व्यक्ति इस समस्या से परेशान है। हैरानी की बात यह है कि इसका कोई पक्का इलाज मौजूद नहीं है और यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है कि कब और किसे सफर के दौरान यह परेशानी घेर लेगी। हालांकि, कुछ सावधानियां रखकर इस असहज स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

एम्स की डॉक्टर ने समझाया सफर में उल्टी आने का असली कारण

एम्स (AIIMS) की न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मंजरी त्रिपाठी के अनुसार, मोशन सिकनेस का सीधा संबंध हमारे कान के अंदर मौजूद ‘बैलेंस सिस्टम’ (वेस्टिबुलर सिस्टम) से है। जब हम किसी वाहन में सफर करते हैं, तो हमारे शरीर के सेंसर (रिसेप्टर्स), कान और आँखें दिमाग को अलग-अलग जानकारी भेजते हैं। इस तालमेल की कमी के कारण दिमाग के खास हिस्से, जैसे ब्रेन स्टेम और हाइपोथैलेमस, उत्तेजित हो जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, जब शरीर की हलचल को महसूस करने वाले रिसेप्टर्स और कान का संतुलन तंत्र आपस में उलझ जाते हैं, तो दिमाग भ्रमित हो जाता है और हमें चक्कर या उल्टी महसूस होने लगती है।

सफर में उल्टी रोकने के लिए क्या करें और क्या नहीं?

  • भोजन का संतुलन: सफर से ठीक पहले बहुत भारी या तैलीय भोजन न करें। हालांकि, बिल्कुल खाली पेट भी न रहें; हल्का नाश्ता या स्नैक्स लेना फायदेमंद रहता है।
  • मोबाइल और किताब से दूरी: चलती गाड़ी में फोन चलाने या किताब पढ़ने से बचें। यह आँखों और दिमाग के तालमेल को बिगाड़कर मोशन सिकनेस को बढ़ा देता है।
  • सीट का सही चुनाव: हमेशा सामने की ओर मुंह करके बैठें। कार में आगे की सीट (फ्रंट सीट) चुनना सबसे अच्छा रहता है क्योंकि वहाँ से बाहर का नज़ारा साफ़ दिखता है।
  • बाहर की ओर देखें: खिड़की से बाहर दूर क्षितिज (Horizon) की ओर देखें। इससे आँखों और कानों को एक जैसे संकेत मिलते हैं और जी मिचलाना कम होता है।
  • शरीर को स्थिर रखें: कोशिश करें कि सिर, कंधे और कमर की हलचल कम हो। अपनी स्थिति को जितना हो सके स्थिर बनाए रखें।
  • संगीत का सहारा: हल्का और मनपसंद संगीत सुनें। रिसर्च के अनुसार, सुखद संगीत ध्यान भटकाने में मदद करता है और मतली को कम करता है।
  • सोने से बचें: चलती गाड़ी में सोने की कोशिश न करें, क्योंकि सोते समय शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है जिससे उल्टी की संभावना बढ़ जाती है।
  • धूम्रपान से परहेज: सफर के दौरान या उससे पहले धूम्रपान (निकोटीन) न करें, इससे तबीयत बिगड़ने का खतरा ज़्यादा रहता है।
  • डॉक्टर की सलाह: अगर समस्या बहुत अधिक हो, तो यात्रा शुरू करने से पहले डॉक्टर द्वारा सुझाई गई उल्टी रोकने की दवा (Anti-emetic) ली जा सकती है।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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