
भारत रत्न का नाम सुनते ही सीना चौड़ा हो जाता है ना? देश का सबसे बड़ा सम्मान, जो हर उस शख्स का सपना होता है जिसने कुछ असाधारण किया हो। अब जेडीयू के नेता केसी त्यागी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार को नामित किया है। बोले, नीतीश समाजवादी आंदोलन का अनमोल रत्न हैं, इन्हें भारत रत्न दो। इससे सवाल उठ खड़े हुए – क्या ये सिर्फ मरणोपरांत मिलता है या जिंदा रहते भी पा सकते हैं? चलिए, दोस्तों, आज इसी पर खुलकर बात करते हैं। नियम क्या कहते हैं, कितने जीवित लोगों को मिला, और नीतीश का केस क्या है – सब डिटेल में समझते हैं।
जीवित रहते मिल सकता है ये सम्मान
सबसे पहले क्लियर कर दूं – हां भाई, जीवित व्यक्तियों को भी भारत रत्न मिल सकता है, और हुआ भी है। 1954 में जब ये पुरस्कार शुरू हुआ, तो सिर्फ जिंदा लोगों के लिए था। मरणोपरांत का कॉन्सेप्ट 1966 में आया, लाल बहादुर शास्त्री पहले थे। लेकिन ज्यादातर रिसीपिएंट्स को उनके जीवनकाल में ही मिला। सोचो, सचिन तेंदुलकर सबसे कम उम्र में जीते-जी पा गए, लता मंगेशकर, अटल बिहारी वाजपेयी, अमर्त्य सेन – ये सब जिंदा थे। 2024 में लालकृष्ण आडवाणी को मिला, वो भी जीवित। तो नीतीश के सपोर्टर्स को चिंता करने की जरूरत नहीं, नियम इजाजत देते हैं।
अब तक कितने जिंदा लोगों को नसीब हुआ
कुल 53 लोगों को ये सम्मान मिल चुका है, और इनमें से ज्यादातर जीवित रहते पाए। शुरुआती सालों में तो 100% जिंदा थे। हाल के दशकों में भी ट्रेंड वही – साहित्य, खेल, राजनीति, साइंस के फील्ड से। 2024 में 5 लोगों को एक साथ दिया गया, वो अपवाद था। नीतीश के केस में उनके 10 बार CM बनने, बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर चेंज करने का क्रेडिट दिया जा रहा। कर्पूरी ठाकुर, चौधरी चरण सिंह जैसे समाजवादियों को मिला, तो नीतीश क्यों नहीं? राजनीतिक मांग तो बनेगी ही।
चयन कैसे होता है, कौन डिसाइड करता?
कोई फॉर्म भरना नहीं पड़ता भाई, कोई नॉमिनेशन प्रोसेस नहीं। पीएम सीधे राष्ट्रपति को सिफारिश भेजते हैं – बस हो गया! सालाना मैक्सिमम 3 लोग, लेकिन कभी-कभी बढ़ जाता। मानदंड? कला, साहित्य, साइंस, पब्लिक सर्विस या कोई भी ह्यूमन एंडेवर जहां एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी काम हो। 2011 में नियम ढीले किए, अब कोई लिमिट नहीं फील्ड की। नीतीश को अगर मिला, तो बिहार डेवलपमेंट के लिए क्रेडिट जाएगा। जेडीयू की चिट्ठी ने हलचल मचा दी, अब गेंद पीएम कोर्ट में है।
मिलने पर क्या-क्या फायदे
पैसे नहीं मिलते, लेकिन स्टेटस कमाल का! राष्ट्रपति से सनद और पीपल के पत्ते वाला मेडल। वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस में 7वां रैंक, लाइफटाइम एयर इंडिया-रेल मुफ्त यात्रा, टैक्स छूट। Z+ सिक्योरिटी अगर जरूरत पड़े, राज्य अतिथि का दर्जा। सोचो, नीतीश को मिला तो बिहार में कितना जोश! ये सुविधाएं जिंदगी भर रहती हैं।
नीतीश का भविष्य क्या कहता है?
राजनीति में कुछ भी हो सकता है। नीतीश का बिहार मॉडल, सोशल जस्टिस का काम – समर्थक तो चिल्ला ही रहे। लेकिन फाइनल कॉल पीएम का। इतिहास गवाह है, कई सरप्राइज हुए हैं। चाहे जो हो, ये डिबेट देश को सोचने पर मजबूर कर रही। आपकी राय क्या है?









