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लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें! कोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में तय किए आरोप, क्या अब जेल जाने की बारी?

लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा कस गया है! कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत पूरे परिवार के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। क्या 20 साल पुराने इस केस में अब जेल की नौबत आएगी? जानें कोर्ट के कड़े आदेश की पूरी सच्चाई।

By Pinki Negi

लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें! कोर्ट ने 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में तय किए आरोप, क्या अब जेल जाने की बारी?
लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में लालू प्रसाद यादव के परिवार को कोई राहत नहीं दी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने साफ़ किया कि इस केस के कुल 98 आरोपियों में से 52 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है, लेकिन लालू परिवार सहित 41 मुख्य आरोपियों के खिलाफ अब मुकदमा चलेगा।

कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ आरोप तय करने के निर्देश दे दिए हैं। मामले के 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद अब शेष बचे आरोपियों को 29 जनवरी को अगली सुनवाई का सामना करना होगा। यह आदेश लालू परिवार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।

लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत पूरे परिवार पर तय हुए आरोप, बढ़ीं कानूनी मुश्किलें

दिल्ली की अदालत ने बहुचर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में लालू प्रसाद यादव के पूरे परिवार पर शिकंजा कस दिया है। कोर्ट ने न केवल पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बल्कि उनकी पत्नी राबड़ी देवी और दोनों बेटों—तेजस्वी यादव व तेज प्रताप यादव के खिलाफ भी आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उनकी बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव भी इस कानूनी घेरे में शामिल हैं। अदालत के इस फैसले का मतलब है कि अब इस घोटाले में लालू परिवार के इन सभी प्रमुख सदस्यों के खिलाफ नियमित आपराधिक मुकदमा (ट्रायल) चलाया जाएगा, जो आने वाले समय में उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत मुश्किलों को बढ़ा सकता है।

पद का दुरुपयोग और जमीन का खेल

दिल्ली की अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए किए गए कार्यों पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने माना कि लालू यादव ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए रेलवे में भर्तियां कीं और उसके बदले में अपनी पत्नी और बच्चों के नाम कीमती संपत्तियां लिखवाईं।

अदालत के अनुसार, इस पूरे खेल में एक सुनियोजित “विनिमय तंत्र” (बदले में कुछ लेना) काम कर रहा था, जिसमें आपराधिक साजिश के तहत लोगों को सरकारी नौकरी दी गई और बदले में उनकी या उनके रिश्तेदारों की जमीनें ले ली गईं। इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि अन्य आरोपियों ने भी इस नेटवर्क को चलाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

लालू परिवार पर चलेगा धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस, 52 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

अदालत ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को इस आपराधिक साजिश का मुख्य हिस्सा माना है। कोर्ट के अनुसार, अन्य आरोपियों ने इस घोटाले को अंजाम देने में परिवार की मदद की। हालांकि, इस मामले में 52 अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण उन्हें कोर्ट ने बरी (आरोपमुक्त) कर दिया है। अब लालू परिवार और शेष आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।

क्या है 20 साल पुराना लैंड फॉर जॉब घोटाला?

यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए (UPA) सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे हाजीपुर, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और मुंबई) में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां करने के बदले में लालू परिवार ने उम्मीदवारों और उनके परिजनों से बेशकीमती जमीनें अपने नाम लिखवाईं।

सीबीआई की जांच के अनुसार, इन नौकरियों के लिए न तो कोई उचित विज्ञापन निकाला गया और न ही भर्ती की तय प्रक्रिया का पालन हुआ। करीब दो दशकों से चल रही इस कानूनी जांच ने अब उस मोड़ पर दस्तक दी है, जहां पूरे परिवार को अदालत में कड़े सवालों और ट्रायल का सामना करना होगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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