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Indian Railways: भारत का वो अनोखा स्टेशन, जहाँ रविवार को नहीं बजता ट्रेन का हॉर्न! वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

क्या आपके पास भी एक से ज्यादा पैन कार्ड हैं? सावधान! अनजाने में की गई यह छोटी सी गलती आपको जेल पहुँचा सकती है और आपको 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत करें ये जरूरी काम।

By Pinki Negi

Indian Railways: भारत का वो अनोखा स्टेशन, जहाँ रविवार को नहीं बजता ट्रेन का हॉर्न! वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
Indian Railways

भारतीय रेलवे आज वंदे भारत स्लीपर जैसी आधुनिक ट्रेनों और शानदार स्टेशनों के साथ दुनिया को चौंका रहा है। विकास के इन बड़े कामों के बीच रेलवे से जुड़े कुछ पुराने और हैरान करने वाले तथ्य आज भी हमें गर्व महसूस कराते हैं। भारत में एक ऐसा अनोखा रेलवे स्टेशन भी है, जहाँ रविवार के दिन ट्रेन का हॉर्न बजाना मना है। अपनी खास परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए यह स्टेशन भारतीय रेलवे के विविधता भरे सफर का एक दिलचस्प हिस्सा है।

भारत के अजब-गजब रेलवे स्टेशन

भारतीय रेलवे में कई ऐसे स्टेशन हैं जो अपनी विचित्र खूबियों के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, नवापुर रेलवे स्टेशन दो राज्यों (महाराष्ट्र और गुजरात) की सीमा में बंटा हुआ है। वहीं, अटारी रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं, आंध्र प्रदेश में ‘वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा’ नाम का एक स्टेशन है, जिसका नाम 28 अक्षरों का है और इसे भारत का सबसे लंबे नाम वाला स्टेशन माना जाता है। ये अनोखी जगहें भारतीय रेल के सफर को और भी रोमांचक बनाती हैं।

रविवार को ट्रेन यात्रा से पहले बरतें सावधानी

अक्सर देखा जाता है कि रविवार के दिन ट्रेनें देरी से चलती हैं या अचानक रद्द कर दी जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय रेलवे हर रविवार को पटरियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए ‘मेगा ब्लॉक’ लेता है। हालांकि यह काम भविष्य में रेल यात्रा को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन इससे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। इसलिए, रविवार को सफर पर निकलने से पहले NTES या RailYatri जैसे ऐप्स पर अपनी ट्रेन का स्टेटस चेक करना सबसे बेहतर रहता है।

बर्धमान का अनोखा स्टेशन

पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में एक ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहाँ रविवार को पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता है। बर्धमान से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित इस स्टेशन पर केवल बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है, लेकिन रविवार को इस ट्रेन का संचालन नहीं होता। इस वजह से रविवार के दिन यहाँ न तो किसी ट्रेन का हॉर्न बजता है और न ही कोई रेलवे अनाउंसमेंट होती है। यह स्टेशन अपनी इसी “पिन ड्रॉप साइलेंस” यानी खामोशी वाली खासियत के लिए चर्चा में रहता है।

बिना नाम का रेलवे स्टेशन

पश्चिम बंगाल का यह अनोखा स्टेशन न केवल अपनी खामोशी, बल्कि अपने बेनाम होने के लिए भी मशहूर है। ताज्जुब की बात यह है कि रविवार को यहाँ का टिकट काउंटर और सभी सेवाएँ बंद रहती हैं, क्योंकि स्टेशन मास्टर खुद टिकट खरीदने के लिए बर्धमान शहर चले जाते हैं। हालाँकि इस स्टेशन का कोई आधिकारिक नाम नहीं है, फिर भी बांकुड़ा और मासाग्राम के बीच यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों के लिए यह एक बेहद ज़रूरी पड़ाव है। आज के ई-टिकटिंग के दौर में भी यह छोटा सा स्टेशन पुराने समय की याद ताज़ा करता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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