
अगर आप बाहर खाना खाने जाते हैं, तो बिल को ध्यान से देखें। अक्सर रेस्टोरेंट खाने के बिल में अलग से ‘सर्विस चार्ज’ जोड़ देते हैं, जिसे देना ग्राहकों के लिए अनिवार्य नहीं है। हाल ही में सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने एक रेस्टोरेंट पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, क्योंकि वह ग्राहकों की इच्छा के विरुद्ध जबरन यह शुल्क वसूल रहा था। नियमों के मुताबिक, सर्विस चार्ज पूरी तरह से वैकल्पिक है और कोई भी होटल या रेस्टोरेंट आपको इसे देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर आपके बिल में भी यह चार्ज लगाया गया है, तो आप इसे हटाने के लिए कह सकते हैं।
मुंबई के रेस्टोरेंट पर बड़ी कार्रवाई
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने नियमों का उल्लंघन करने पर मुंबई के मशहूर ‘बोरा बोरा’ रेस्टोरेंट चेन पर सख्त कार्रवाई की है। यह रेस्टोरेंट सरकारी गाइडलाइंस के खिलाफ जाकर ग्राहकों के बिल में अपने आप 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज जोड़ रहा था। मुंबई के एक जागरूक ग्राहक ने इसकी शिकायत ‘नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन’ पर की, जिसके बाद हुई जांच में रेस्टोरेंट को दोषी पाया गया। आदेश में साफ कहा गया है कि सर्विस चार्ज पूरी तरह स्वैच्छिक है और रेस्टोरेंट इसे बिल में अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकते। यह कार्रवाई उन सभी होटलों के लिए एक सबक है जो ग्राहकों पर छिपे हुए चार्ज थोपते हैं।
बदतमीजी करना रेस्टोरेंट को पड़ा भारी
मुंबई के बोरा बोरा रेस्टोरेंट ने न केवल बिल से सर्विस चार्ज हटाने से मना किया, बल्कि विरोध करने पर ग्राहक के साथ बदतमीजी भी की। CCPA ने स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया था कि ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज लेना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
कोर्ट के आदेश और सरकारी गाइडलाइंस के बावजूद, यह रेस्टोरेंट अपने बिलिंग सिस्टम में डिफॉल्ट रूप से चार्ज जोड़ रहा था। इस मामले ने साबित कर दिया है कि कोई भी रेस्टोरेंट कानून से ऊपर नहीं है और ग्राहकों के अधिकारों का हनन करने पर उन्हें भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
जांच में सामने आई सर्विस चार्ज और GST की बड़ी धांधली
CCPA की जांच में मुंबई के इस रेस्टोरेंट की गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। जांच के दौरान पाया गया कि रेस्टोरेंट ने मार्च और अप्रैल 2025 के बीच हर ग्राहक के बिल में जबरन सर्विस चार्ज जोड़ा था, जिसे हटाना मुमकिन नहीं था। इतना ही नहीं, नियमों के खिलाफ जाकर इस सर्विस चार्ज पर GST भी वसूला जा रहा था। जब ग्राहकों ने शिकायत करने की कोशिश की, तो पता चला कि रेस्टोरेंट का ईमेल एड्रेस भी काम नहीं कर रहा था। बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी रेस्टोरेंट ने ग्राहकों की समस्याओं को अनसुना कर दिया, जिसके कारण अब उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया गया है।
नियमों के उल्लंघन का सबूत मिलने पर CCPA का सख्त ऐक्शन
मामले की सुनवाई के दौरान रेस्टोरेंट ने दावा किया कि उसने सर्विस चार्ज वसूलना बंद कर दिया था और यह ग्राहकों की मर्जी पर निर्भर था। हालांकि, CCPA ने इस दावे को खारिज कर दिया क्योंकि रेस्टोरेंट इस बात का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया कि उसने समय रहते नियमों का पालन किया था। जांच में यह भी सामने आया कि रेस्टोरेंट ने पीड़ित ग्राहक को पैसे तब तक रिफंड नहीं किए, जब तक सरकारी अधिकारियों ने दखल नहीं दिया। सीसीपीए ने स्पष्ट किया कि केवल बातों से काम नहीं चलेगा, नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
रेस्टोरेंट में जबरन सर्विस चार्ज वसूलना गैर-कानूनी
अक्सर रेस्टोरेंट बिल में पहले से ही ‘सर्विस चार्ज’ जोड़ देते हैं और विरोध करने पर बदतमीजी या हाथापाई पर उतारू हो जाते हैं। ध्यान रखें कि भारत में सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से आपकी मर्जी पर निर्भर है; यह केवल एक ‘टिप’ की तरह है, कोई अनिवार्य टैक्स नहीं। अगर कोई रेस्टोरेंट जबरदस्ती यह चार्ज वसूलता है, तो यह ‘गलत ट्रेड प्रैक्टिस’ (Unfair Trade Practice) के तहत आता है। आप सबसे पहले इसे बिल से हटाने की मांग करें। यदि वे मना करते हैं, तो डरने के बजाय तुरंत सरकारी हेल्पलाइन पर उनकी शिकायत दर्ज कराएं ताकि उन पर कानूनी कार्रवाई हो सके।









