
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में ज़मीन और घर खरीदने वालों के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। पिछले दो सप्ताह पहले सर्वर बदले जाने के कारण, रजिस्ट्री विभाग का 2017 और उससे पहले का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल से गायब हो गया है। इसके अलावा, रिकॉर्ड की मैनुअल कॉपी भी या तो पुरानी और ख़राब हालत में हैं या फिर पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं, जिससे लोगों का काम रुक गया है।
सर्वर अपग्रेड के बाद पुरानी रजिस्ट्री जानकारी हुई गायब
राजस्व विभाग ने ज़मीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए पुराने ‘प्रेरणा’ सर्वर को मेघराज क्लाउड सर्वर (NGC) से बदल दिया है। इस बदलाव से सर्वर धीमा होने की समस्या तो खत्म हो गई है, लेकिन एक नई परेशानी खड़ी हो गई है।
पोर्टल से 2017 से पहले का सारा डेटा गायब हो गया है। अब लोग यह नहीं देख पा रहे हैं कि उनकी संपत्ति पहले किसे और कितनी बार बेची गई थी। इस वजह से कई खरीदार-विक्रेता परेशान हैं और उनका बैंक से लोन भी नहीं हो पा रहा है, क्योंकि रजिस्ट्री कार्यालय में मैनुअल रिकॉर्ड देखना भी संभव नहीं है।
रजिस्ट्री रिकॉर्ड न मिलने से लोग परेशान
सिविल लाइंस स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में पिछले चार महीनों से निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण सभी पुराने कागज़ी रिकॉर्ड (मैनुअल रिकॉर्ड) अस्त-व्यस्त हालत में कमरों में बंद पड़े हैं। वकील विवेक गुप्ता ने बताया कि संपत्ति की खरीद से पहले जांच (Verification) के लिए ये दस्तावेज़ अब उपलब्ध नहीं हैं। रिकॉर्ड न मिलने के कारण कोई भी व्यक्ति रजिस्ट्री कराने से पहले संपत्ति की ठीक से जांच नहीं कर पा रहा है, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों काफी परेशान हैं।
पुराने संपत्ति रिकॉर्ड दिखने में देरी क्यों?
एआईजी स्टाम्प श्याम सिंह बिसेन ने बताया कि पोर्टल पर अभी 2017 से पहले का रिकॉर्ड दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि सर्वर बदला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डाटा को लगातार शिफ्ट किया जा रहा है और इस संबंध में एनआईसी (NIC) से बात हो गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी और उसके बाद सभी पुराना डाटा पोर्टल पर दिखने लगेगा।









