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सबसे पावरफुल कौन? DM और पुलिस कमिश्नर में कौन है ज्यादा ताकतवर, जानें दोनों के अधिकार और शक्तियां

DM (जिलाधिकारी) और पुलिस कमिश्नर में कौन है सबसे ज़्यादा ताकतवर? ज़िले के प्रशासनिक प्रमुख और पुलिस प्रमुख के तौर पर, इन दोनों अधिकारियों के पास कौन-कौन से विशिष्ट अधिकार और शक्तियां होती हैं? जानिए ज़िले में कानून-व्यवस्था और प्रशासन पर किसका अंतिम नियंत्रण होता है, और कौन सबसे पावरफुल माना जाता है।

By Pinki Negi

सबसे पावरफुल कौन? DM और पुलिस कमिश्नर में कौन है ज्यादा ताकतवर, जानें दोनों के अधिकार और शक्तियां
DM vs Police Commissioner

देश में आम लोगों के बीच ज़िलाधिकारी (DM) और पुलिस कमिश्नर जैसे बड़े प्रशासनिक पदों की शक्तियों को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। लोग यह जानना चाहते हैं कि इन दोनों में से कौन ज़्यादा शक्तिशाली है, उनकी मुख्य ज़िम्मेदारियाँ क्या हैं, और उन्हें कितनी सैलरी (वेतन) और सुविधाएँ मिलती हैं। आइए हम सरल भाषा में इन दोनों महत्वपूर्ण पदों के काम, अधिकार और आय के बारे में समझते हैं।

ज़िला मजिस्ट्रेट (DM)

ज़िला मजिस्ट्रेट, जिसे संक्षेप में डीएम कहते हैं, एक आईएएस अधिकारी होता है और ज़िले का मुख्य प्रशासक होता है। डीएम को ज़िले की पर्यवेक्षक (Supervising) कुर्सी माना जाता है। इनकी मुख्य ज़िम्मेदारियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, राजस्व से जुड़े काम, सरकारी योजनाओं को लागू करना, विकास कार्यों की निगरानी करना और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

आमतौर पर, 5-6 साल के अनुभव के बाद एक आईएएस अधिकारी डीएम बनता है। डीएम ज़िले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता है, जैसे कि धारा 144 लागू करना। ये अपनी प्रशासनिक शक्ति के कारण बहुत शक्तिशाली माने जाते हैं और राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं।

पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner)

पुलिस कमिश्नर का पद बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में लागू होता है, जहाँ आबादी और अपराध ज़्यादा होते हैं। कमिश्नरेट सिस्टम में, पुलिस कमिश्नर सबसे बड़े अधिकारी होते हैं और वे एक आईपीएस (IPS) अधिकारी होते हैं।

इनके पास एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होती हैं, जिसकी वजह से वे कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीधे फैसले ले सकते हैं। इस व्यवस्था वाले शहरों में, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) समेत अन्य सभी पुलिस अधिकारी सीधे कमिश्नर को रिपोर्ट करते हैं। कमिश्नर का पद राज्य के नियमों पर निर्भर करता है, जैसे दिल्ली में यह डीजीपी (DGP) रैंक का होता है, जबकि अन्य शहरों में आईजीपी (IGP) रैंक के अधिकारी भी कमिश्नर बन सकते हैं।

DM और पुलिस कमिश्नर बनने की प्रक्रिया

जिलाधिकारी (DM) बनने के लिए सबसे पहले यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Civil Services Exam) पास करके आईएएस (IAS) अधिकारी बनना होता है। कई सालों के अनुभव के बाद उन्हें जिले के डीएम के रूप में नियुक्त किया जाता है। वहीं, पुलिस कमिश्नर बनने के लिए भी इसी यूपीएससी परीक्षा को पास करके आईपीएस (IPS) अधिकारी बनना ज़रूरी है। आईपीएस अधिकारी के रूप में ASP, DSP, या SP जैसे पदों पर काम करने के बाद, अनुभव के आधार पर उन्हें पुलिस कमिश्नर बनाया जाता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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