
गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में फ्री शिक्षा (RTE) के तहत दाखिला दिलाने के नियम अब पहले से ज़्यादा सख्त हो गए हैं। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि अब दाखिले के लिए अभिभावक (माता-पिता) और बच्चे दोनों का आधार कार्ड होना ज़रूरी है। इसके साथ ही, जो बच्चे पहले से आरटीई के तहत पढ़ रहे हैं, उनके लिए ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर बच्चों के पास अपार आईडी नहीं होगी, तो उन्हें फीस की भरपाई और अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिल पाएंगे। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले आधार कार्ड की इतनी अनिवार्यता नहीं थी।
आरटीई प्रवेश अब पूरी तरह ऑनलाइन
जिला समन्वयक वीरू प्रजापति के अनुसार, इस साल आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन निगरानी में रहेगी। आवेदन करने से लेकर स्कूल में दाखिला होने तक, हर चरण पर बच्चों की संख्या, प्रवेश के प्रयासों और यदि प्रवेश नहीं हो पाया तो उसके कारण की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई भी प्राइवेट स्कूल आरटीई के बच्चों को प्रवेश देने से मना करता है, तो शिक्षा विभाग उस पर कार्रवाई करेगा।
आरटीई (RTE) पोर्टल पर करें आवेदन
शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत आवेदन केवल www.rte25.upsdc.gov.in पोर्टल पर ही किए जाएंगे। एडमिशन मिलने के बाद, स्कूल को चुने गए बच्चों का आधार सत्यापन (Aadhaar verification) करके उनकी जानकारी पोर्टल पर भरनी होगी। इसी से बच्चे का अपार आईडी (APAR ID) बनेगा। अगर यह आईडी नहीं बनती है, तो स्कूल को बच्चे की फीस का पैसा (प्रतिपूर्ति) नहीं मिलेगा।
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले हर योग्य बच्चे के लिए सरकार हर महीने 450 रुपये फीस के तौर पर स्कूल को देगी। अगर आपके आवेदन में कोई गलती है, तो आपको ब्लॉक स्तर की हेल्प डेस्क पर बुलाया जाएगा, जहाँ गलतियों को सुधारा जा सकेगा। जो बच्चे आवेदन करने से छूट गए हैं, उनके लिए एक विशेष चरण (Special Phase) भी चलाया जाएगा।
प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी और सख्त कार्रवाई
प्रदेश सरकार अब प्रवेश प्रक्रिया के हर चरण की राज्य स्तर पर समीक्षा करेगी। जिन जिलों में सीटों की तुलना में कम एडमिशन हुए हैं, वहाँ के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब माँगा जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई भी प्राइवेट स्कूल बच्चों के एडमिशन में आनाकानी करता है, तो उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है। आपको बता दें कि पिछले साल, अकेले इस जिले में 3500 से ज़्यादा बच्चों को दाखिला मिला था।









