
जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर भारी टैक्स लगाया है दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति पैसा हो गई है। इस बात पर ट्रंप की आजकल कड़ी आलोचना भी की गई कि उसे भारत के साथ ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए था। इस मामले पर अमेरिका के पूर्व शीर्ष अधिकारी जेक सुलिवन और कर्ट कैंपबेल का कहना है कि भारत और अमेरिका का रिश्ता कमजोर नहीं होना चाहिए और यह साझेदारी ऐसे ही बरकरार रहनी जरुरी है।
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दोनों देशों की दोस्ती है महत्वपूर्ण
अमेरिका और भारत का बहुत ही बढ़िया और मजबूत रिश्ता है और अमेरिकी अगर ऐसा ही बर्ताव करते हैं तो इनका रिश्ता कमजोर हो जाएगा और अमेरिका एक महत्वपूर्ण सहयोगी को खो सकता है। यह जानकारी सुलविन और कैंपबेल, फॉरेन अफेयर्स पत्रिका में लेख के जरिए बताई गई है। ट्रंप ने जिन नीतियों को अपना रहा है उससे भारत चीन और रूस के साथ अच्छे संबंध बना सकता है जो कि उनके लिए बिलकुल भी सही नहीं है। चीन की तकनीक और रानीतिक क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्हें इस लेख में पीएम नरेंद्र मोदी, चीनी रुसी राष्ट्रपारियों के साथ मुलाकात का भी जिक्र किया है जो कि हाल ही में शंघाई सहयोग नीतियां (SCO) के सम्मलेन में हुई थी। ट्रंप को सावधान किया जा रहा है कि उनका यह सख्त बर्ताव उनके लिए ही हानिकारक हो सकता है।
पाकिस्तान से ज्यादा भारत के साथ मजबूत रिश्ता
अमेरिका को दोनों पूर्व अधिकारी सलाह देते हैं कि भारत और पकिस्तान को एक ही निगाह से न देखे यह उनकी बड़ी गलती रहेगी। पाकिस्तान की तुलना में भारत का रिश्ता अमेरिका के साथ बहुत ही महत्वपूर्ण है और यह एक सहयोगी है।
ट्रंप ने पकिस्तान के साथ व्यापार करने का समझौता किया है और वे पकिस्तान के सेवा प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात करके आए हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरह भारत पर 25% का अतिरिक्त टैक्स लगाया हुआ है। अमेरिका पाकिस्तान के साथ आतंकवाद का सहयोग जारी रख रहा है लेकिन उसे अपने और भारत के रिश्तों के बारे में सोचना चाहिए।









