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हवाई सफर होने जा रहा है महंगा! ATF की कीमतों में 114% का भारी उछाल, ईरान युद्ध से एयरलाइंस को लगा डबल झटका

ईरान युद्ध और मध्य‑पूर्व तनाव के बीच एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें सिर्फ एक महीने में 114% तक उछल गई हैं। पहली बार ATF ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के पार चला गया, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ी और हवाई सफर आने वाले दिनों में और महंगा होने की संभावना है।

By Pinki Negi

हवाई सफर होने जा रहा है महंगा! ATF की कीमतों में 114% का भारी उछाल, ईरान युद्ध से एयरलाइंस को लगा डबल झटका

हवाई सफर अब और महंगा होने जा रहा है। ईरान सहित पूरे मध्य‑पूर्व क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव ने न केवल कच्चे तेल की बाजार को उल्टा दिया है, बल्कि एयरलाइंस की लागत को इतनी ऊंचाई पर धकेल दिया है कि अब यात्री किराए में बढ़ोतरी लगभग अनिवार्य मानी जा रही है।

ATF में 114% का भारी उछाल

इसका सबसे सीधा निशाना जेट फ्यूल, यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों पर पड़ा है, जिसमें सिर्फ एक महीने के भीतर 114% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ATF की कीमतें पहली बार ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के पार चली गई हैं, जहां दिल्ली में यह लगभग ₹2,07,341 प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है, जबकि इसी मार्च की शुरुआत में यह लगभग ₹96,638 प्रति किलोलीटर थी।

मध्य‑पूर्व तनाव का ग्लोबल असर

इस हाई रफ्तार उछाल के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकी हुई हैं और लगातार दबाव बनाए हुए हैं। ईरान, अमेरिका और इजराइल के खींचातानी से ऊर्जा बाजार में निरंतर अस्थिरता बनी हुई है, जिस कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में डर–आधारित स्टॉकपिलिंग और रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव बढ़ा है।

इसका सीधा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ा है, क्योंकि ATF भी रिफाइंड क्रूड ऑयल पर ही टिका है। ग्लोबल डेटा के मुताबिक, ATF की कीमतें फरवरी के अंत में लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मार्च के अंत तक लगभग 195 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं, यानी महज एक महीने में लगभग दोगुनी हो गई हैं।

मेट्रो शहरों में रिकॉर्ड लागत

इस उछाल का असर पूरे सब‑प्रीमियम एविएशन हब पर साफ दिखाई दे रहा है। देश की चार प्रमुख मेट्रो एयरपोर्ट पर ATF की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में यह लगभग ₹2.07 लाख प्रति किलोलीटर, कोलकाता में ₹2.05 लाख, मुंबई में ₹1.94 लाख और चेन्नई में ₹2.14 लाख प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है। यह न सिर्फ ईंधन‑लागत के बोझ को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय एविएशन सेक्टर अंतरराष्ट्रीय तेल‑संकट के साथ‑साथ स्थानीय टैक्स‑व्यवस्था की वजह से भी संकट में है। कई एनालिस्ट इसे “कॉस्ट वॉल” की तरह देख रहे हैं, जिससे छोटे यात्री वर्ग और लो‑कॉस्ट एयरलाइंस को सबसे ज्यादा असर हो सकता है।

एयरलाइंस पर डबल प्रेशर

इस वजह से एयरलाइंस की स्थिति “डबल मार” जैसी बन गई है। एविएशन खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी आमतौर पर 30 से 40 फीसदी तक होती है, जिसका मतलब यह है कि ईंधन के दाम में यह उछाल न सिर्फ उनके मार्जिन पर सीधा असर डालता है, बल्कि परिचालन‑मॉडल को भी बदलने को मजबूर कर सकता है।

InterGlobe Aviation, Air India और Akasa Air जैसी प्रमुख कंपनियों ने इसी दबाव के चलते फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना शुरू कर दिया है, और एयरलाइन इंडस्ट्री के अंदर यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में टिकट‑दरों में और बढ़ोतरी लगभग तय है। यात्री जो अभी घरेलू रूट पर बचत ढूंढ रहे हैं, वे भी इस बोझ के चलते अंतरराष्ट्रीय और लंबी दूरी की उड़ानों पर रुपये की जेब में ज्यादा दर्द महसूस कर सकते हैं।

सरकार और रुपये की कमजोरी का दबाव

फिलहाल स्थिति को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नौडू ने राज्य सरकारों से ATF पर लगने वाले VAT को कम करने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई राज्यों में यह टैक्स 18 से 29 फीसदी के बीच है, जिससे एयरलाइंस की लागत और भी बढ़ जाती है। साथ ही, रुपये की कमजोरी ने भी परिस्थिति को बढ़ा दिया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की खरीद डॉलर में होती है और जैसे‑जैसे डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है, एयरलाइन को वही क्वांटिटी खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

इसके साथ‑साथ जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कई देशों के एयरस्पेस बंद या प्रतिबंधित होने से फ्लाइट रूट लंबे हो गए हैं, जिससे हर उड़ान में जेट फ्यूल खपत और बढ़ रही है। इस संयुक्त दबाव ने एविएशन सेक्टर को ऐसी संक्रमण‑अवस्था में खड़ा कर दिया है, जहां टिकट‑किराए, रूट‑प्लानिंग और यहां तक कि यात्रा‑व्यवहार में दृश्यमान बदलाव दिखने लगे हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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