
सोने के भाव इस साल ₹1.76 लाख के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद ₹1.48 लाख तक नीचे गिरे। हालांकि बाजार में फिर से तेजी है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल बदलावों के चलते सोना ₹80,000 प्रति तोला तक आ सकता है। यह गिरावट आम खरीदारों के लिए गहने खरीदने का एक सुनहरा मौका साबित हो सकती है।
BRICS देशों की भारी खरीदारी से आसमान पर पहुँचे दाम
सोने की कीमतों में हालिया उछाल की सबसे बड़ी वजह BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों द्वारा की गई भारी खरीदारी है। इन देशों ने अकेले ही वैश्विक मांग का लगभग 50% हिस्सा खरीदा है ताकि अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। केंद्रीय बैंकों की इस अंधाधुंध होड़ और वैश्विक अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की डिमांड को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया है।
रूस-अमेरिका तनाव में नरमी
बदलते वैश्विक हालातों के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। अब तक डॉलर के बजाय सोने का भंडार बढ़ा रहे रूस ने अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस फिर से अमेरिकी डॉलर में व्यापार बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग घटेगी और इसकी कीमतों में भारी कमी आ सकती है, जो खरीदारों के लिए राहत की खबर होगी।
सोने की कीमतों में आ सकती है ऐतिहासिक गिरावट
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से डॉलर को अपनाता है, तो वह अपने विशाल सोने के भंडार को बाजार में बेच सकता है। रूस द्वारा सोने की इस संभावित भारी बिकवाली से ग्लोबल मार्केट में सोने की सप्लाई अचानक बढ़ जाएगी। आपूर्ति (Supply) ज्यादा होने से सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आना तय है, जिससे घरेलू बाजारों में भी सोना काफी सस्ता हो सकता है।
क्या युद्ध विराम से गिरेगा सोने का भाव?
सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह रूस-यूक्रेन युद्ध का संभावित अंत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध किसी समझौते या कूटनीतिक बातचीत से समाप्त होता है, तो वैश्विक बाजार की अनिश्चितता खत्म हो जाएगी। ऐतिहासिक रूप से, जब भी दुनिया में शांति और स्थिरता आती है, निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने से पैसा निकालकर अन्य संपत्तियों में लगाते हैं, जिससे सोने की कीमतें तेजी से घटती हैं।
बड़े खरीदारों के हाथ पीछे खींचने से टूटेगा सोना
हाल के महीनों में चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने सोने की रिकॉर्ड खरीदारी की थी, लेकिन अब ये देश अपनी खरीद कम करने के संकेत दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन बड़े खरीदारों की तरफ से मांग (Demand) में कमी आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर भारी दबाव बनेगा। मांग घटने की स्थिति में सोना अपने मौजूदा ऊंचे स्तरों से तेजी से नीचे की ओर फिसलना शुरू कर देगा, जिससे आम खरीदारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
क्या ₹80,000 तक गिरेगा सोने का भाव?
Bloomberg के एक ताजा अनुमान ने बाजार में हलचल मचा दी है, जिसके अनुसार भारत में सोने की कीमतें ₹70,000 से ₹80,000 प्रति 10 ग्राम तक आ सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट रातों-रात नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के साथ धीरे-धीरे होगी। अनुमान है कि 2027 के अंत तक बाजार में पूरी तरह स्थिरता आने पर सोना ₹80,000 के स्तर के आसपास जाकर टिक सकता है।
सोने की खरीदारी में जल्दबाजी न करें
बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सोना वैश्विक संकटों के प्रति बेहद संवेदनशील है, इसलिए कीमतों में गिरावट के अनुमानों के बीच सावधानी बरतना जरूरी है। जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम वास्तव में नीचे नहीं आ जाते, तब तक आम खरीदारों को अपनी खरीदारी की योजना बहुत सोच-समझकर बनानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बाजार का रुख समझे बड़े निवेश से बचें, ताकि आप भविष्य में कीमतों के गिरने पर ऊंचे भाव पर फंसने के नुकसान से सुरक्षित रह सकें।









