
ITR Processing Delay: जो लोग टैक्स भरते है उनके लिए जरूरी जानकारी है. आईटीआर (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर है, लेकिन ITR फाइल करना ही काफी नहीं है. इसे वेरिफाई करना भी जरूरी है. जिसके बाद इनकम टैक्स विभाग उसे प्रोसेस करती है. यदि आप 30 दिनों के अंदर ITR वेरिफाई नहीं करते हैं तो आपका रिटर्न रद्द हो सकता है. आपको रिफंड मिलने में देरी हो सकती है और साथ ही कई तरह की परेशानी भी हो सकती है. इसलिए समय से पहले अपनी ITR को वेरिफाई कर लीजिए ताकि आगे आपको दिक्कत न हो.
प्रोसेसिंग करने में लगता है ज्यादा समय
ITR वेरिफाई देरी होने का मुख्य कारण प्रोसेस की जांच प्रक्रिया होती है. टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बताया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दी गई जानकारी और टैक्स की गणना की जांच करती है. यह प्रोसेस टैक्स देने वाले की आय की स्रोतों पर निर्भर करती है और इसमें कुछ घंटों से लेकर 6 महीने का भी समय लग सकता है. उदाहरण- आईटीआर-1 जल्दी प्रोसेस हो जाती है, क्योंकि इसके अंतर्गत पूंजीगत लाभ या बिज़नेस से हुई आय शामिल नहीं होती है. वहीं अगर आपकी कमाई शेयर या म्यूचुअल फंड से हुई है, तो आईटीआर प्रोसेस होने में ज्यादा समय लग सकता है.
प्रोसेसिंग में क्यों होती है देरी ?
सीए अभिनव जैन ने बताया कि ITR की प्रोसेसिंग खुद होती है. यदि आपने जो जानकारी दी है वह आपके फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से मिल जाती है, तो प्रोसेसिंग का काम जल्दी हो जाता है. वहीं कैपिटल गेन या बिजनेस इनकम मिलाने में ज्यादा समय लगता है. इसके अलावा अगर TDS की राशि दोनों फॉर्म में मिलती -जुलती नहीं है तो ऐसे में ITR प्रोसेस नहीं होता है. साथ ही कई लोग अपने बैंक अकाउंट की गलत जानकारी, पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी अलग -अलग होने से भी प्रोसेसिंग का काम देरी से होता है.
प्रोसेसिंग में देरी होने से ऐसे बचें
जब कोई व्यक्ति अपना ITR फाइल करके उसे वेरिफाई कर देता है, तो प्रोसेस की पूरी जिम्मेदारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की होती है. अगर आपकी इनकम और डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में कोई अंतर मिल जाता है, तो इस बारे में आपको एक नोटिस भेज दिया जाता है. जिसके बाद आपको ITR में कुछ बदलाव करने होते है. मान लीजिए, अगर आपको FD से ब्याज मिल रहा है, जिसे आपने ITR में नहीं दिखाया है, तो ऐसे में आपको एक नोटिस मिलेगा.
इससे बचने के लिए आपको हर साल मिलने वाले ब्याज की जानकारी लेनी चाहिए. इसके अलावा जब आपकी FD मैच्योर हो जाती है और आपको पूरी राशि मिल जाती है, तब आप ब्याज को अपनी इनकम के रूप में दिखा सकते हैं.
